Thursday, November 25, 2010

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खून से लथपथ थे लाशो के ढेर ,
अपनों को धुंडू किसी अपने  बगैर ,
जमीं मेरी सरकी  मेरे पैरो के निचे ,
तभी कोई हलके मेरे पैर खीचे ,
.
.................... हल्की  सी आहट थी हल्की सी तान ,
.................... नन्ही सी जां में ना थी इतनी जान ,
.................... पैरो पे अपने कभी चल ना पाती ,
.................... मासूम सी बच्ची को येही सजा थी l
.
हाथो में सर था लथपथ लहू से ,
जीती थी गोली किसी  जिंदगीसे ,
मेरा आंसू जाके लहू में गया मिल ,
कभी वो भी था मेरे अपनों में शामिल l 

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; अतुल राणे ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

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