Monday, May 9, 2011

;;;;;;;;;;;;;;;; चालली कोण हि सुंदर नार ;;;;;;;;;;;;;;;;;;


लटके लटके चाल चालुनी जीव आता घेणार ,
कसे कळावे नाव हिचे परी क्षणात हि जाणार ,
नयन कट्यारी आधीच त्यावर कातील काजळधार ,
वळूनही पाहत नाही  झाले कुणा कुणावर वार .
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हिच्या  नयन पाशात गुंतण्या  मीन जाहले सारे ,
कुठे जराशी झलक  पाहण्या  फिरती  होऊन वारे , 
खळी गालची भासे कोणा जगण्याला  आधार,
वीर जगाचे असोत  कोणी इथेच होती ठार ... 
.
अशी सुंदरा जाता जाता पायाशी अडखळली ,
तिला धराया भोवतालची मुले पुढे सरपटली ,
कोण्या हाती कशी पडावी चपळ असे हि खार , 
सावरून मग स्वत स्वताला क्षणात होई पसार  .
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ती गेली पण विरतच नाही हृदयावरची प्रतिमा,
त्या कर्त्याच्या कल्पनेस मग द्यावी वाटे उपमा,
घेई मग ती अनामिका मम कवितेचा आकार ,
कुणा ना ठावे  कुठे चालली कोण हि सुंदर नार .
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चालली कोण हि सुंदर नार ......!
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;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;अतुल राणे ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

Monday, April 18, 2011

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; सूर्यास ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

अग्निगोल हा जळी बुडाला विझेल बघ निमिषात ,
सागरातुनी सूर्य चालला रात्रीच्या उदरात .


........... सांगा कोणी या योग्याला आग तुझ्या अंतरी ,
........... चंद्रकोर बघुनी भिजलेली वितळी लोण्यापरी .


घुटमळूनी हा असा केशरा वाट पाहशील किती ,
आज चंद्रमा नभात नाही अमावसेची तिथी .


........... समदुखी रे आपण , उरले आठवणींचे भास ,
........... मला प्रिया अन तुला चंद्रमा दर्शन नाही आज.



;;;;;;;;;;;;;;;;; अतुल राणे ;;;;;;;;;;;;;;;;

Monday, March 7, 2011

;;;;;;;;;;;;;;;;;; तु ;;;;;;;;;;;;;;;;;;

बघता तुला असा मी , लाजून चूर होते ,
येता जरा समीप  झटकून दूर होते .
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हि कोणत्या कळीची तू ओढलीस लाली
हळुवार स्पर्श  होता उमलून फुल होते .
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मग  लाभते नव्याने हि ओढ  जीवघेणी ,
जेव्हा तुझी बटा ती गाली फितूर होते .
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होती तुझी अदा ती, कि कोणता तराणा ,
जणू धुंदल्या  वीणेचे अदृश्य सूर होते .
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;;;;;;;;;;;;;;;;; अतुल राणे ;;;;;;;;;;;;;;;;

Sunday, February 27, 2011

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; प्रश्न ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

तुझा तेवढा एकच प्रश्न आठवतोय आता ,
'कुठला एवढा विचार करतोस असा येता जाता ? '
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'माझ्यासोबत असतानाही तुझ्यातच असतोस , 
मी काही बोलले कि तेवढ्यापुरता हसतोस ,
अचानकच थांबतोस छान गाता गाता ,
कुठला एवढा विचार करतोस असा येता जाता ? '
.
तुझा असला प्रश्न सारया आभाळभर दाटलेला   ,
उत्तराचा भार माझ्या काळजावर साचलेला .
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खरं सांगू , हे कोड मलाच सुटत  नाही
मनात गणित चालूच राहतं  उत्तर मिळत नाही
काळ अलगद निघून जातो तुझ्यासोबत माझा  
मनात मात्र वाढत जातो शब्दांचा बोझा
मागे ठेवून प्रश्न सारे उठून निघून जातेस
बघता बघता सहजपणे गर्दीत विरून जातेस .

लक्षात येतं बोललो  नाही काहीच जाता जाता
तुझा तेवढा एकच प्रश्न आठवतोय आता  .....!

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; अतुल राणे ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; 

Thursday, February 3, 2011

;;;;;;;;;;;;;;; कुठून कविता देऊ ? ;;;;;;;;;;;;;;;;

सौंदर्याचा माज म्हणू कि म्हणू हिची शिरजोरी ,
आता कविता भाळत नाही मम चातुर्यावारी .


गंज चढे या बुद्धीला कि हृदय निकामे झाले ,
कसे चार शब्दांना माझे पान पोरके झाले ?


पाठ फिरविली शब्दांनी तरी मन त्यामागून फिरते ,
कुशीत माझ्या वही कवितेची अश्रू ढाळीत शिरते...!


प्रसन्न होईल कशी देवता कसे तिला समजावू ,
कोरी पाने रुसतील, त्यांना कुठून कविता देऊ ..?


;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; अतुल राणे ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

Wednesday, January 19, 2011

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; नास्तिक ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

तुझं अस्तित्व नाकारताना....
खरंतर,
मला सिद्ध करायचं असतं ,
माझ्यातल्या
नास्तिकत्वाच अस्तित्व .
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.
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पण तरीही माझ्यासाठी नसलेल्या ........
तुझे आभार ,
तुझ्यामुळेच नास्तिक या शब्दाला अर्थ आहे .......!


;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; अतुल राणे ;;;;;;;;;;;;;;;;;;

Thursday, December 23, 2010

;;;;;;;;;;;;;;;;;; माचिस ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

कैसे मैं सर उसके मारू येह दोष ,
माचिस की डिबिया में रहेती जो रोज ,
नन्ही सी तीली लगाये न आग ,
वो थी जिसके हाथो में उसका येह दोष l
.
उजाला किया जिसने घर था वो मेरा ,
जला सबसे पहेले वो बिस्तर था मेरा ,
न सोचा था उसने जलाने  से पहेले ,
मेरी बच्ची थी ओढ़े सपने सुँनहेरे l
.
तखिये के निचे जो गीता थी पूरी ,
जली वो भी बिन मेरे आधी अधूरी ,
उसी का वचन कोई मरता न मारे ,
 हुवा फिर खड़ा मैं उसी के सहारे l


;;;;;;;;;;;;;;;;;;; अतुल राणे ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

Friday, December 17, 2010

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; परीस ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

परीस शोधण्या निघे बापुडा , लोखंडाची माळ गळी ,
जो तो धोंडा घासत सुटला ,माळ होईना सोनसळी ,
दिवस बुडाले, मास लोटले, मानत नव्हता हार ,
अशात गेली वर्षे , झाला प्रौढपणी बेजार .


शेवटच्या श्वासात आठवे दुर्लक्षित ती माला ,
हाय पाहतो काय ,जाहली कधी सोन्याची माला ,
हाती येवून असा कोणत्या रुपात निसटून गेला ,
ना ओळखले परीसाला , अन जन्म फुकाचा झाला .


अशा कथेपरी आयुष्यातून परीस निसटून जाती ,
सुवर्णापरी सर्व सख्यांची करी कवड्यांतून गिनती ,
सांग लेकरा अशा कथेतून घेशील कसला बोध
आयुष्याचे सोने करतो असा परीस तू शोध .!


;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; अतुल राणे ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

;;;;;;;;;;;;;;;;;;; हे नारी ;;;;;;;;;;;;;;;;;;

तुफान होऊन  दौडत ये तू ,
हो झाशीची राणी ,
डोंगर हि कापील चळचळा ,
सागर मागील पाणी .

...........तू खडगाची धार बनून  ये ,  
...........जगदंबा तलवार ,
...........जरी  मायेची उरात गंगा ,
...........पाठीवर संसार ..

नव्या युगाची नवी नार तू ,
जुनीच  ती वैदेही ,
तूच द्यावी का अग्निपरीक्षा ,
पतिव्रता  जर देही ...(?)

...........भ्रष्ट जाहली सर्व मर्कटे ,
...........लंका जाळील कोण ?
...........नायक हि सामील रावणा ,
...........तुजला तारील  कोण ?

कलियुगाची देत कारणे ,
घेती ना अवतार ,
असे देवपण काय कारणे
होती  तुज आधार ..?

...........स्मरण असू दे जिजाउचे त्या ,
...........जिने घडविला शिवा ,
...........कशास तुज मग भिक्षेमधला
...........तेहतीस टक्के हवा ..?

 ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; अतुल राणे ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

Thursday, November 25, 2010

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; २६ / ११ ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;

खून से लथपथ थे लाशो के ढेर ,
अपनों को धुंडू किसी अपने  बगैर ,
जमीं मेरी सरकी  मेरे पैरो के निचे ,
तभी कोई हलके मेरे पैर खीचे ,
.
.................... हल्की  सी आहट थी हल्की सी तान ,
.................... नन्ही सी जां में ना थी इतनी जान ,
.................... पैरो पे अपने कभी चल ना पाती ,
.................... मासूम सी बच्ची को येही सजा थी l
.
हाथो में सर था लथपथ लहू से ,
जीती थी गोली किसी  जिंदगीसे ,
मेरा आंसू जाके लहू में गया मिल ,
कभी वो भी था मेरे अपनों में शामिल l 

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; अतुल राणे ;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;